परिमेय संख्या की परिभाषा और उदाहरण | Rational Numbers in Hindi

गणित में संख्याओं को अलग-अलग वर्गों में बाँटा जाता है, जैसे – प्राकृतिक संख्या, पूर्णांक, परिमेय संख्या और अपरिमेय संख्या। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण वर्ग है परिमेय संख्या (Rational Numbers)।
स्कूल स्तर की गणित में यह टॉपिक बेहद जरूरी होता है, क्योंकि आगे चलकर भिन्न, दशमलव, अनुपात और वास्तविक संख्याओं की समझ इसी पर आधारित होती है।

इस लेख में हम जानेंगे:

  • परिमेय संख्या किसे कहते हैं
  • परिमेय संख्या की परिभाषा
  • उदाहरण
  • गुणधर्म
  • पहचानने का तरीका
  • परिमेय और अपरिमेय संख्या में अंतर
  • FAQs

परिमेय संख्या क्या होती है?

परिमेय संख्या वह संख्या होती है जिसे हम p/q के रूप में लिख सकते हैं, जहाँ:

  • p और q दोनों पूर्णांक हों
  • q ≠ 0 (हर कभी शून्य नहीं होता)

सरल शब्दों में कहें तो:

जिस संख्या को भिन्न (Fraction) के रूप में लिखा जा सके, वह परिमेय संख्या कहलाती है।

यही कारण है कि इन्हें अंग्रेज़ी में Rational Numbers कहा जाता है, क्योंकि ये ratio यानी अनुपात को दर्शाती हैं।


परिमेय संख्या की परिभाषा

वे सभी संख्याएँ जिन्हें दो पूर्णांकों के अनुपात p/q (q ≠ 0) के रूप में व्यक्त किया जा सके, परिमेय संख्याएँ कहलाती हैं।


परिमेय संख्या के उदाहरण

1. भिन्न के रूप में

  • 1/2
  • 3/5
  • –4/7

2. पूर्णांक भी परिमेय होते हैं

क्योंकि हर पूर्णांक को 1 से भाग देकर लिखा जा सकता है:

  • 5 = 5/1
  • –3 = –3/1
  • 0 = 0/1

3. दशमलव संख्याएँ

जो दशमलव समाप्त हो जाते हैं या बार-बार दोहराते हैं:

  • 0.5 = 1/2
  • 2.75 = 11/4
  • 0.333… = 1/3

ये सभी परिमेय संख्या के उदाहरण हैं।


किसी संख्या को परिमेय कैसे पहचानें?

अगर कोई संख्या:

भिन्न में बदली जा सके
दशमलव रूप में समाप्त होती हो
या दशमलव बार-बार दोहराता हो

तो वह परिमेय संख्या है।

लेकिन अगर दशमलव कभी खत्म न हो और न ही दोहराए — तब वह अपरिमेय संख्या होती है।


परिमेय और अपरिमेय संख्या में अंतर

परिमेय संख्याअपरिमेय संख्या
p/q के रूप में लिखी जा सकती हैp/q में नहीं लिखी जा सकती
दशमलव समाप्त या दोहराता हैदशमलव अनंत और non-repeating
उदाहरण: 1/2, 0.75, –3उदाहरण: √2, π

परिमेय संख्याओं के गुण (Properties of Rational Numbers)

बंद गुण (Closure Property)

दो परिमेय संख्याओं का जोड़, घटाव, गुणा और भाग (शून्य से भाग छोड़कर) हमेशा परिमेय ही होता है।

क्रमगुणित और योगगुणित

  • जोड़ और गुणा में क्रम बदलने से उत्तर नहीं बदलता
  • समूह बदलने से भी परिणाम वही रहता है

संख्या रेखा पर स्थिति

दो परिमेय संख्याओं के बीच अनंत परिमेय संख्याएँ मौजूद होती हैं।


परिमेय संख्या क्यों महत्वपूर्ण है?

  • भिन्न और दशमलव समझने में मदद करती है
  • बीजगणित की नींव बनाती है
  • वास्तविक संख्याओं की आधारशिला है
  • प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछी जाती है

FAQs – परिमेय संख्या से जुड़े सामान्य प्रश्न

1. क्या 0 परिमेय संख्या है?

हाँ।
क्योंकि 0 = 0/1 लिखा जा सकता है।


2. क्या सभी पूर्णांक परिमेय होते हैं?

हाँ।
हर पूर्णांक को 1 से भाग देकर लिखा जा सकता है।


3. क्या 0.333… परिमेय है?

हाँ।
क्योंकि यह 1/3 के बराबर होता है।


4. क्या √2 परिमेय संख्या है?

नहीं।
क्योंकि इसका दशमलव न समाप्त होता है और न दोहराता है।


5. क्या सभी दशमलव संख्याएँ परिमेय होती हैं?

नहीं।
केवल वही दशमलव परिमेय होते हैं जो समाप्त हों या बार-बार दोहराएँ।


निष्कर्ष

परिमेय संख्या गणित का एक आधारभूत विषय है।
जो संख्या भिन्न p/q (q ≠ 0) में बदली जा सके, वही परिमेय संख्या कहलाती है। इसमें पूर्णांक, भिन्न और कई दशमलव संख्याएँ शामिल होती हैं।

अगर आपको number system, fractions या algebra समझना है, तो पहले Rational Numbers की अवधारणा मजबूत करना बेहद जरूरी है।

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